सिविल सेवा परीक्षा, जिसे आईएएस परीक्षा के रूप में जाना जाता है, सालाना केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित करवाई जाती है। इसे देश में सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। लेकिन सही दृष्टिकोण और रणनीति के साथ, एक उम्मीदवार पहले प्रयास में परीक्षा को क्लियर कर सकता है। उम्मीदवारों को तैयारी शुरू करने से पहले यूपीएससी पाठ्यक्रम, पैटर्न, पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया और ऐसे अन्य महत्वपूर्ण विवरण जैसे परीक्षा की आवश्यकताओं को जानना और समझना आवश्यक है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आईएएस की परीक्षा हिंदी या इंग्लिश किस माध्यम से देने में आपको ज्यादा फायदा मिलेगा। आइये जानते हैं।

स्टूडेंट्स अपनी सहूलियत के आधार पर इस बात का फैसला लेते हैं कि उन्हें आईएएस परीक्षा हिंदी में देनी है या इंग्लिश में, लेकिन वाकई में यह एक कड़वा सच है कि हिंदी की तुलना में आपको इंग्लिश मीडियम में ज्यादा किताबों के ज्यादा विकल्प मिलेंगे। बहुत से अनुभवी लेखकों ने भूगोल, अर्थशास्त्र, इतिहास आदि की किताबे इंग्लिश भाषा में लिखी है। इतना ही नहीं आपको ऑनलाइन भी कई ऐसी इंग्लिश बुक्स मिल जाएगी जिनके माध्यम से आप किसी भी विषय को पढ़ सकते हैं। यानि कि इंग्लिश से पढ़ने के लिए ऑनलाइन भी आपको ढेर सारा कंटेंट मिलेगा। बात करें कंरट अफेयर को तैयार करने की तो बहुत से अख़बार जैसे हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया, दा हिंदू आदि भी इंग्लिश मीडियम वाले स्टूडेंट्स के लिए उपलब्ध है।

आपको हिंदी में पढ़ने के लिए ऑनलाइन बहुत ही कम कंटेंट मिलेगा। यह भी सच है कि हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए उत्कृष्ट किताबों की लिस्ट बहुत छोटी है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हिंदी विषय में पढ़ाई करने के लिए अच्छी किताबें उपलब्ध ही नहीं है। ऐसी कई किताबे हैं जिस से हिंदी मीडियम वाले स्टूडेंट्स तैयारी कर सकते हैं।

लेकिन एक महत्वपूर्ण बात जो ध्यान देने योग्य है वो यह कि यदि आप इंग्लिश लैंग्वेज में कमजोर हैं और आप फिर भी इंग्लिश में एग्जाम देने की सोच रहे हैं तो आप खुद के पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार रहे है। इसलिए इंग्लिश लैंग्वेज की अच्छी जानकारी ना होने पर हिंदी विषय को चुनना ही सही है।

दूसरी तरफ कुछ कोचिंग संस्थान कहते हैं कि आईएएस की परीक्षा में टॉप 100 छात्रों में केवल इंग्लिश मीडियम वाले ही कैंडिडेट्स हैं इनमे हिंदी वाले कोई नहीं है लेकिन ऐसा नहीं है। हिंदी मीडियम से परीक्षा देने वाले भी टॉप 100 की लिस्ट में शामिल होते हैं। लेकिन टॉप 100 की लिस्ट में इंग्लिश मीडियम वाले इसलिए ज्यादा होते हैं क्योकिं आज के समय में ज्यादातर स्टीडेंट्स इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ते हैं और वे इसी कारण इंग्लिश से परीक्षा देने का विकल्प चुनते हैं। इसलिए इंग्लिश से परीक्षा के लिए अप्लाई करने वालों की संख्या ज्यादा होती है।

तो आपको जरा भी ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि आप हिंदी से परीक्षा की तैयारी कर के इसे क्लियर नहीं कर सकते हैं।

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