National Politics: देश की पॉलिटिक्स में भूचाल के संकेत; एक और बड़ी पार्टी टूटने की कगार पर

pc: anandabazar

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पर्दे के पीछे बड़े उलटफेर होने की खबरें आ रही हैं। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार बदल रहा है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को अंदरूनी इस्तीफों और एक के बाद एक कई झटकों की वजह से झटके लग रहे हैं। इस बीच, बंगाल की राजनीति से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है, जिससे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को छोड़कर 'नई तृणमूल कांग्रेस' पार्टी बनाने की चर्चा तेज हो गई है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अंदरूनी असंतोष, बागी नेताओं की गतिविधियों और कुछ विधायकों की गुप्त बैठकों की वजह से बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक हालात दोहराए जा सकते हैं।

व्हिसलब्लोअर MLA के खिलाफ कार्रवाई और बगावत की चिंगारी
TMC ने अपने दो MLA के खिलाफ पार्टी में कथित सिग्नेचर मामले को लेकर पार्टी के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने, यानी 'व्हिसलब्लोअर' की भूमिका निभाने के लिए सख्त कार्रवाई की है। इस मामले में TMC ने रीताब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, इन दोनों MLA को पार्टी से निकाले जाने के बाद एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को सपोर्ट करने के लिए पार्टी के अंदर एक नया ग्रुप और एक नई पार्टी बनाई जा रही है।

अंदरूनी विवाद बढ़ रहा है
इन दोनों MLA को निकाले जाने के साथ ही TMC में अंदरूनी उथल-पुथल अब सामने आ गई है। इन घटनाक्रमों से साफ है कि चुनाव के बाद पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। निकाले गए MLA और पार्टी के कुछ नाराज गुट एक साथ आकर नया राजनीतिक विकल्प बनाने की तैयारी कर रहे हैं, ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि आने वाले दिनों में ममता बनर्जी के सामने मुश्किलें बढ़ेंगी। इस संभावित नई पार्टी की चर्चा ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मचा दी है।

सूत्रों के मुताबिक, करीब 15 से 20 MLA ऐसे नेताओं के संपर्क में हैं, जो पार्टी में प्रेशर ग्रुप बनाकर लीडरशिप पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इनमें से किसी भी MLA ने खुले तौर पर बगावत का ऐलान नहीं किया है।

महाराष्ट्र से तुलना क्यों?
बंगाल में अभी जो हो रहा है, उसकी तुलना महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स से की जा रही है। 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी थी, जिससे शिवसेना में बड़ी फूट पड़ गई थी। बाद में शिंदे गुट को ही असली शिवसेना माना गया।

फिर, अजित पवार ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) में फूट डालकर शरद पवार की पकड़ कमजोर कर दी। दोनों ही मामलों में, हालात बंद कमरे में मीटिंग, MLA में नाराजगी और लीडरशिप के खिलाफ बढ़ते गुस्से से शुरू हुए।

बंगाल में भी अभी ऐसी ही चर्चाएं हो रही हैं। TMC में अलग-अलग पावर सेंटर बनने और चुनावी हार के बाद नेताओं में नाराजगी ने इन अटकलों को और हवा दी है।

क्या सच में TMC में फूट पड़ेगी?
पॉलिटिकल एनालिस्ट के मुताबिक, फिलहाल पश्चिम में महाराष्ट्र जैसी बगावत के चांस कम हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि अभी किसी भी बड़े ग्रुप ने लीडरशिप का खुलकर विरोध नहीं किया है। किसी भी फूट के लिए बड़ी संख्या में MLA और ऑर्गेनाइजेशनल लीडर्स के सपोर्ट की जरूरत होगी। फिर भी, दो MLA को निकालना, ममता बनर्जी का पार्टी में फूट का पब्लिक में आरोप लगाना, और नाराज़गी की लगातार आ रही खबरें साफ़ दिखाती हैं कि TMC लीडरशिप इस खतरे को गंभीरता से ले रही है।

अगर आने वाले दिनों में और MLA बागी नेताओं का खुलकर समर्थन करते हैं, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव हो सकता है। अभी, सबकी नज़रें ममता बनर्जी के अगले कदमों और पार्टी के अंदर चल रही उथल-पुथल पर हैं।