Early onset stroke: क्या आपका ब्लड टाइप कम उम्र में स्ट्रोक का कारण है? नई रिसर्च ने बढ़ाई चिंता
- byVarsha
- 26 May, 2026
pc: saamtv
बहुत से लोग सोचते हैं कि ब्लड ग्रुप सिर्फ़ ब्लड डोनेशन या इमरजेंसी सिचुएशन के लिए ही काम की जानकारी है। लेकिन, साइंटिस्ट्स की एक नई स्टडी में अब एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। इस स्टडी से पता चला है कि कुछ खास ब्लड ग्रुप वाले लोगों को कम उम्र में स्ट्रोक का खतरा ज़्यादा हो सकता है।
मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी में छपी एक जेनेटिक स्टडी में ब्लड टाइप और स्ट्रोक के बीच के रिश्ते की गहराई से जांच की गई। रिसर्चर्स के मुताबिक, यह स्टडी यह समझने के लिए ज़रूरी हो सकती है कि जेनेटिक फैक्टर्स ब्लड क्लॉटिंग और दिल से जुड़े रिस्क को कैसे प्रभावित करते हैं।
रिसर्च में असल में क्या मिला?
इस रिसर्च में 48 अलग-अलग जेनेटिक स्टडीज़ से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया गया। इसमें लगभग 17,000 स्ट्रोक के मरीज़ और लगभग 600,000 हेल्दी लोग शामिल थे। इस ग्रुप के लोगों की उम्र 18 से 59 साल के बीच थी।
रिसर्चर्स ने पाया कि ब्लड ग्रुप A1 वाले लोगों में 60 साल की उम्र से पहले दूसरे ब्लड ग्रुप्स के मुकाबले स्ट्रोक का खतरा 16 परसेंट ज़्यादा था। वहीं, ब्लड ग्रुप O1 वाले लोगों में यह खतरा 12 परसेंट कम था।
इसी तरह, ब्लड ग्रुप B वाले लोगों में भी स्ट्रोक का खतरा थोड़ा ज़्यादा था। डॉ. स्टीवन किटनेस ने कहा कि दुनिया भर में कम उम्र में स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं और इस तरह का स्ट्रोक युवाओं में चिंता का विषय बनता जा रहा है।
अर्ली स्ट्रोक क्या होता है?
स्ट्रोक दिमाग में खून की सप्लाई में अचानक रुकावट या दिमाग की किसी खून की नस का फटना है। इससे दिमाग को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और दिमाग के सेल्स को नुकसान हो सकता है।
60 साल की उम्र से पहले होने वाले स्ट्रोक को ‘अर्ली-ऑनसेट स्ट्रोक’ कहा जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे स्ट्रोक के नतीजे गंभीर हो सकते हैं। मरीज़ को लंबे समय तक विकलांगता, बोलने में दिक्कत, शरीर का कोई हिस्सा काम करना बंद कर सकता है या याददाश्त कम हो सकती है।
स्ट्रोक के आम लक्षण
चेहरे का एक तरफ झुक जाना
अचानक कमज़ोरी या झुनझुनी
बोलने में दिक्कत
तेज़ सिरदर्द
धुंधली नज़र
कान बजना
बैलेंस बिगड़ना
ब्लड ग्रुप A से खतरा क्यों बढ़ सकता है?
साइंटिस्ट्स के मुताबिक, यह कनेक्शन ब्लड क्लॉटिंग प्रोसेस से जुड़ा हो सकता है। ब्लड टाइप A प्लेटलेट्स, ब्लड वेसल की अंदरूनी परत, खून में क्लॉटिंग प्रोटीन और ब्लड सर्कुलेशन के काम पर असर डाल सकता है। रिसर्चर्स के मुताबिक, इससे ब्लड वेसल में आसानी से क्लॉट बनने की संभावना बढ़ जाती है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि इससे घबराने की कोई बात नहीं है। यह बढ़ा हुआ खतरा काफी कम है। रिसर्चर्स ने यह भी साफ किया कि सिर्फ इसलिए कि उनका ब्लड टाइप A है, किसी को भी एक्स्ट्रा टेस्ट या खास मेडिकल केयर की ज़रूरत नहीं है।
जवान लोगों में स्ट्रोक के कारण
इस स्टडी में एक और ज़रूरी बात यह है कि 60 साल की उम्र के बाद होने वाले स्ट्रोक में ब्लड टाइप के बीच कोई खास संबंध नहीं था। इससे पता चलता है कि कम उम्र में स्ट्रोक और बुढ़ापे में स्ट्रोक के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।






