अधिकतर छात्र परीक्षा की तैयारी में पूरा सिलेबस खत्म करने, रिवीजन करने और सैंपल पेपर या पुराने प्रश्नपत्र हल करने पर पूरा ध्यान देते हैं। इसके बावजूद कई बार नतीजे उम्मीद से कम आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी वजह पढ़ाई की कमी नहीं बल्कि परीक्षा के दौरान सही रणनीति का अभाव होता है।
परीक्षा हॉल में बिताए गए शुरुआती 15 मिनट पूरे पेपर की दिशा तय कर सकते हैं। अगर इनका सही उपयोग किया जाए, तो स्कोर बेहतर हो सकता है और गलतियों की संभावना कम हो जाती है।
रीडिंग टाइम को हल्के में न लें
अधिकांश बोर्ड परीक्षाओं में उत्तर लिखने से पहले रीडिंग टाइम दिया जाता है। लेकिन कई छात्र इस समय को गंभीरता से नहीं लेते। जबकि यही समय रणनीति बनाने का सबसे अहम मौका होता है।
जो छात्र इन 15 मिनटों में योजना बनाते हैं, वे न सिर्फ समय का बेहतर प्रबंधन करते हैं, बल्कि उनके उत्तर भी अधिक व्यवस्थित और स्पष्ट होते हैं।
स्टेप 1: प्रश्नपत्र को समझें, घबराएं नहीं
रीडिंग टाइम के दौरान घबराने के बजाय प्रश्नपत्र को ध्यान से समझें। इस दौरान पहचान करें:
- सीधे एनसीईआरटी आधारित प्रश्न
- इंटरनल चॉइस वाले प्रश्न
- स्टेप-वाइज मार्किंग वाले लंबे उत्तर
- ज्यादा स्कोरिंग सेक्शन
यह रणनीति कम अंक वाले सवालों पर अधिक समय बर्बाद होने से बचाती है।
स्टेप 2: मजबूत सवालों को पहले तय करें
शिक्षकों के अनुसार, जिन प्रश्नों पर पूरा भरोसा हो, उन्हें पहले चिह्नित करना चाहिए। ऐसे सवाल पहले हल करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और पेपर की शुरुआत सकारात्मक होती है।
लंबे प्रश्नपत्रों में यह तरीका खास तौर पर प्रभावी साबित होता है।
स्टेप 3: समय का बंटवारा पहले ही तय करें
परीक्षा में सबसे आम गलती है समय का गलत इस्तेमाल। रीडिंग टाइम में यह तय कर लें कि किस सेक्शन को कितना समय देना है। लंबे उत्तरों पर जरूरत से ज्यादा समय देना बाकी पेपर को प्रभावित कर सकता है।
विषय के अनुसार रणनीति बनाएं
- गणित: प्रश्न हल करने का क्रम पहले तय करें।
- विज्ञान: न्यूमेरिकल और डायग्राम वाले सवालों की योजना जल्दी बनाएं।
- सामाजिक विज्ञान: छोटे उत्तर और मैप वर्क से पहले अंक सुरक्षित करें।
- भाषाएं: लेखन कार्य का फॉर्मेट सोच-समझकर चुनें।
परीक्षक क्या देखते हैं
परीक्षक सिर्फ सही उत्तर नहीं, बल्कि उत्तर की स्पष्टता, संरचना और तार्किक क्रम भी देखते हैं। जो छात्र पहले से योजना बनाकर लिखते हैं, वे सभी उप-प्रश्नों को अटेम्प्ट कर पाते हैं, जिससे अनावश्यक अंक कटने से बच जाते हैं।
यह नियम क्यों जरूरी है
आज के समय में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सख्त कट-ऑफ के बीच छोटे सुधार भी बड़ा फर्क ला सकते हैं। 15 मिनट की यह रणनीति किसी अतिरिक्त कोचिंग की मांग नहीं करती, बल्कि परीक्षा हॉल में अनुशासन और समझदारी की जरूरत होती है।
अगर छात्र इसे आदत बना लें, तो उनका स्कोर और आत्मविश्वास दोनों बेहतर हो सकते हैं।






